बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ पिछले कुछ सालों से लगातार चर्चाओं में बनी रही है। नए-नए वस्तुओं के लॉन्च से लेकर वर्तमान सरकार द्वारा कंपनी पर की गई महरबनियाँ इन चर्चाओं का मुद्दा रही हैं। लेकिन अबएक ऐसा खुलासा सामने आया है वो कंपनी के कर्ताधर्ता बाबा रामदेव की छवि पर बड़े सवाल खड़े करता है।

बाबा रामदेव ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में कालेधन के खिलाफ लड़ाई छेड़ी थी। ये अलग बात है कि जब जेल जाने की बारी आई तो वो सलवार-कमीज़ पहनकर भागे लेकिन उन्होंने देश से कालाधन खत्म करने की कसम खाई थी। अब जो हाल ही में पतंजलि को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, उसमें तथ्य इस बात की संभावना पैदा करते हैं पतंजलि कालाधन पैदा कर रही है।

CNBCTV18.com ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि पतंजलि की 21 सब-कम्पनियाँ हैं यानि ऐसी कम्पनियाँ जिन्हें कंपनी ने शुरू किया हो या उसको खरीद लिया हो। साथ ही 26 कंपनियों के साथ पतंजलि की पार्टनरशिप भी है। इन सब-कंपनियों में से ज़्यादातर में व्यावसायिक गतिविधियाँ नहीं चल रही हैं लेकिन इसके बावजूद इनमें करोड़ों का निवेश किया गया है।

इन 21 कंपनियों में से केवल चार ऐसी हैं जिनमें व्यावसायिक कामकाज चल रहा है। बाकि की कंपनियों में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही हैं। बस इन कंपनियों में तीन चीज़े एक जैसी हैं। पहली, उनके बैंक खातों में पड़े पैसों का कर आ रहा है जिसे कंपनी कमाई के रूप में दिखाती है। दूसरी, इन कंपनियों को पतंजलि ने सीधे ना खरीदकर कई लोगों के द्वारा हिस्सों में खरीदा है। तीसरी, इन सभी में से ज़्यादातर के नाम बदले गए हैं।

कोई भी ऐसी कंपनी जो किसी भी तरह का व्यवसायिक काम ना कर रही हो, और जिसके पास पूँजी भी ना हो उसके बावजूद उसमें करोड़ों का निवेश कर देना या खरेद लेना अपने कालेधन को छुपाने का तरीका माना जाता है।

दरअसल, किसी कंपनी में निवेश करने पर टैक्स नहीं लगता है। लोग ऐसी नकली कम्पनियाँ बनाकर उनमें अपना पैसा निवेश करते हैं और फिर वोही कंपनी फिर से उसी व्यक्ति की कंपनी में पैसे निवेश कर देती है। इस तरह टैक्स ना भरते हुए कालाधन बना लिया जाता है। ऐसी कंपनियों को शैल कंपनी कहा जाता है।

इस बात को सरकार भी मानती है। इसीलिए ‘न्यू कंपनी एक्ट 2013’ कानून लाया गया था। उसके मुताबिक, अगर किसी भी ऐसी कंपनी में निवेश किया जाए जिसके पास पूँजी ना हो या उसकी व्यावसायिक गतिविधि नहीं है तो उस निवेश पर टैक्स लगाया जा सकता है।

CNBCTV18.com ने भी इस संदर्भ में कई वकीलों से बातचीत की। उन्होंने भी इस मामले के बारे में जानकार यही कहा कि इस तरह की कंपनियों में व्यावसायिक गतिविधि ना होते हुए निवेश करना संदेह पैदा करता है। इस आधार पर बाब रामदेव की कंपनी पतंजलि पर कालाधन छुपाने का संदेह है।

पतंजलि पर संदेह इसलिए भी होता है क्योंकि पिछले कुछ सालों में कंपनी का फायदा अचानक से बहुत ज़्यादा बढ़ गया है। 2016-17 में पतंजलि का सालाना राजस्व 9,187 करोड़ रुपयें रहा।

अब आपको बताते हैं कि किस तरह इस काम को अंजाम दिया जा रहा है

रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ (आरओसी) के मुताबिक, ‘वर्वे कोर्पोरेशन’ पतंजलि की ही एक कंपनी है। ये कंपनी 2010 में बनी थी। इसका पुराना नाम ‘वर्वे बिल्डिंग सोलुशन’ था। इस कंपनी को पतंजलि ने नहीं बनाया था। इसके संस्थापक आशुतोष कुमार पांडे और महेश अग्रवाल थे।

कंपनी के बनने के कुछ महीने बाद ही किशन वीर शर्मा और सरोज शर्मा ने इस कंपनी को पुराने संस्थापकों से ले लिया। इसके बाद इसका नाम भी बदलकर ‘वर्वे कोर्पोरेशन’ रख दिया गया।

‘वर्वे कोर्पोरेशन’ अभी तक किसी भी व्यवसायिक गतिविधि में शामिल नहीं थी। इसके बावजूद 2015 में पतंजलि ने इस कंपनी के 98.94% शेयर 279 रुपियें प्रति शेयर के हिसाब से खरीदे। इस तरह पतंजलि ने 27 करोड़ रुपियें का निवेश ‘वर्वे कोर्पोरेशन’ में किया।

चौकाने वाली बात ये भी है कि किशन वीर शर्मा पतंजलि से जुड़ी और भी कई कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर स्थापित हैं।

इसी तरह एक और कंपनी का उदाहरण लिया जा सकता है। 2004 में एक ‘गोल्डन फीस्ट’ के नाम से एक कंपनी बनाई गई। रामधान सिंह और आशीष अग्रवाल 2011 तक इसके डायरेक्टर थे। 2011 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया।

2011 में ही स्कॉटलैंड की एक एनआरआई भारतीय महिला सुनीता पोडर ने इस कंपनी में 8.5 करोड़ रुपियें निवेश किये। सुनीता 2009 से 2015 तक पतंजलि में शेयर होल्डर रही हैं। इस निवेश के बाद ही ‘गोल्डन फीस्ट’ ने 8.51 करोड़ रुपियें पतंजलि फ़ूड हर्बल पार्क कंपनी में निवेश कर दिए।

2013 में ‘गोल्डन फीस्ट’ ने पतंजलि फ़ूड हर्बल पार्क को 22 करोड़ रुपियें के बैंक लोन के लिए एसबीआई को बैंक गेरेंटी भी दी। जबकि अभी तक पतंजलि का इस कंपनी से कुछ लेना देना भी नहीं था। उसके बावजूद ये कदम ‘गोल्डन फीस्ट’ ने उठाया।

अब टुकड़ों में पतंजलि ने इस कंपनी को खरीदा। पहले, पतंजलि के उप-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने ‘गोल्डन फीस्ट’ के 22.23 लाख शेयर खरीदे। इसके बाद 2015-16 में सुनीता ने अपने 88.9 लाख शेयर अपने पति सरवन पोडर को ट्रांसफर कर दिए। सरवन ने ये शेयर पतंजलि को दे दिए।

पतंजलि ने इस तरह 16.3 प्रति रुपियें शेयर के हिसाब से इस कंपनी में 11 करोड़ रुपियें का निवेश किया। जबकि इस कंपनी में किसी तरह की व्यवसायिक गतिविधि नहीं हो रही थी।

इसी तरह पतंजलि ने हेर्बोवेद ग्राम प्राइवेट लिमिटेड, युगंकुल कृषि प्राइवेट लिमिटेड, हेर्बो गौ प्राइवेट लिमिटेड, शिवालिक एग्रोहर्ब्स प्राइवेट लिमिटेड और इस तरह की अन्य बहुत सी कंपनियों में करोड़ों रुपियें निवेश किये। इन कंपनियों में भी व्यवसायिक गतिविधियाँ नहीं चल रही थी।