मोदी सरकार पर लगातार उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाने के आरोप लग रहे हैं। पिछले कुछ समय में प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाने वाले उद्योगपति गौतम अडानी को फायदा पहुँचाने के आरोप सरकार पर बढ़ते जा रहे हैं।

हाल ही में हुई एक सरकारी बोली में गौतम अडानी की कंपनी को सरकारी कंपनी से ज्यादा गैस बेचने के लाइसेंस मिलने के बाद सरकार पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर लोग प्रतिकिर्याएँ दे रहे हैं। रविश कुमार नाम से एक ट्विटर अकाउंट ने लिखा कि पूरे देश को नाले की गैस में उलझाकर। अपने मालिक अडानी को 21 राज्यों की सीएनजी पीएनजी गैस का ठेका दे दिया!!

दरअसल, गौतम अडानी के समूह ने इलाहाबाद समेत 11 शहरों में सीएनजी बेचने के लिए लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं। बोली लगाने वाले 86 शहरों में से 48 के नतीजों के मुताबिक अडानी ने खुदरा सीएनजी से लेकर ऑटोमोबाइल और पाइपयुक्त खाना पकाने की गैस के लाइसेंस हासिल किये हैं। जबकि देश की सबसे बड़ी गैस वितरण (सीजीडी) बोली से बाहर हो गई।

चौकाने वाली बात ये हैं कि किसी सरकारी कंपनी ने भी इतने शहरों में लाइसेंस प्राप्त नहीं किये हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के अनुसार, सरकारी कंपनी इंडियन आयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने चार शहरों के अधिकार जीते हैं।

अन्य सरकारी कंपनी पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की एक इकाई भारत गैस रिसोर्सेज लिमिटेड ने छह शहरों के लिए लाइसेंस प्राप्त किये हैं। जबकि पिछले महीने बोली का दौर ख़त्म हुआ, आईओसी, बीपीसीएल और अडानी गैस लिमिटेड शीर्ष बोलीदाता थे।

एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि अडानी समूह को सबसे ज्यादा लाइसेंस गुजरात और उत्तरप्रदेश के शहरों में मिले हैं। पीएनजीआरबी के मुताबिक, अडानी गैस ने गुजरात के सुरेंद्रनगर, बरवाला, नवसारी, खेड़ा और पोरबंदर जिलों के साथ-साथ उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर, इलाहाबाद और ओडिशा में बालासोर, बिहार के गया और कर्नाटक के कन्नूर के अधिकार जीते हैं।