पिछले चार सालों में बलात्कार की घटनाओं में जैसा उछाल आया उससे ज्यादा इजाफा हुआ बेशर्म लोगों का। जो बच्चियों के साथ रेप की घटना के बाद अपना खिला हुआ चेहरा लिए नज़र आते है जैसे उन्हें कानून पर यकीन कम और कुर्सी पर बैठे नेता जी पर ज्यादा भरोसा हो की नेता जी अपने आदमी है बचा तो लेंगें ही। आम जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है वो एक बाद एक हो रही घटनाओं को याद नहीं रख पाती है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में 40 बच्चियों के साथ रेप करने की पुष्टि हुई। बच्चियों को दवा देकर उनके साथ दुष्कर्म करने की बात सामने आई। उसके बाद बालिका गृह को चलाने वाले ब्रजेश ठाकुर का नाम सामने आया वो शख्स जिसकी पहुँच सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक है।

वो शख्स जिसने अपने उसी रुतबे का इस्तेमाल करते हुए करोड़ो रुपए सरकार से बालिका गृह के नाम पर लेता रहा, उसे कानून का कैसा डर वो तो मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ ऐसे नज़र आ रहा है जैसे वो कह रहा हो कर लो करते बने क्योंकि बिहार में बहार है और मेरी जेब में नीतीश कुमार है।

कुछ ऐसा ही देखने को मिला यूपी के उन्नाव बलात्कार मामले में, जहां बीजेपी विधायक पर बलात्कार और हत्या करने का आरोप लगा। विधायक को सीएम योगी ने अपने यहाँ तलब किया। लिफ्ट के पास खड़े कुलदीप सिंह के चेहरे पर मुस्कान ऐसी थी जैसे उन्हें प्रदेश के बेस्ट विधायक का अवार्ड देने के लिए बुलाया जा रहा हो।

इसके बाद जब जब मीडिया के सामने आये वो कहते रहे की जो जांच करवानी है जिससे करवानी है करवा लो मुझे कोई समस्या नहीं है। हालाकिं इसके बाद सीबीआई की जांच हुई जिसमें उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

मगर जितने दिन विधायक आजाद रहे उतने दिन वो मीडिया के सामने ऐसे पेश आते रहे जैसे उन्होंने बहुत ही अच्छा काम किया है जो उनके एक बयान से भी नज़र आता है। जिसमें उन्होंने पीड़िता के लिए कहा था वो निचले स्तर के लोग है कुछ भी बोलेंगें।

विधायक फिलहाल तो जेल में है मगर बीजेपी से निकाले नहीं गए है। अब इसके पीछे वोट बैंक वजह मानी जाये या फिर बहुबाल के आगे नतमस्तक हुई बीजेपी जो अभी पार्टी में कुलदीप सिंह सेंगर को अपनी पार्टी से निकाला नहीं है एक रेप आरोपी शख्स अभी भी उसी पार्टी में बने हुआ जिस पार्टी नारा दिया था ‘बेटी बचाव और बेटी पढ़ाओ का नारा देती है’

इन दो मुकुराते हुए चेहरों को देखिए, ये इंसानियत के मुहं पर ऐसा तमाचा जिससे दुनियाभर में बैठे बलात्कारी सोच रखने वालों को बल मिलता है इन्हें पुलिस प्यार से हिरासत में ले जाती है, वीआईपी ट्रीटमेंट देती है और जनता को चुप कराने के लिए कुछ दिन तक जेल में भी रखती है मगर ये बाद में आज़ाद हो जाते है और फिर समाज में अपना बाहुबल दिखाते नज़र आते है।

क्योंकि बलात्कारियो के समर्थन में ‘रैली’ आजाद भारत में सिर्फ मोदी सरकार के कार्यकाल में निकाली गई। अब सरकार इसपर तारीफ करे न करे मगर सच यही है क्योंकि जब साथी भए कोतवाल तब डर काहे का।