अच्छे दिन, सालाना दो करोड़ रोजगार के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनका पूरा मंत्रिमंडल सहित पूरी बीजेपी ‘पांच ट्रिलियन डॉलर’ इकॉनमी का राग अलाप रही है। केंद्र सरकार पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात कर रही है, इसकी बात करना अच्छा है लेकिन सवाल ये है कि इस भारी भरकम लक्ष्य को सरकार कैसे छुएगी?

आकड़ें बताते हैं कि मोदी सरकार में रोजगार दर घटी है। सरकार नए रोजगार पैदा करने में असफल रही है। ऑटो सेक्टर में 24.97 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन सेक्टर औंधे मुँह पड़े हैं। दिल्ली-एनसीआर में बड़े बिल्डर्स डूब गए जिसकी वजह से लाखों लोग अपने घर का सपना देख रहे हैं। साथ ही इस सेक्टर में काम करने वाले मजदूरों से लेकर अन्य काम करने वाले लोग अब बेरोजगार हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आर्थिक सुधार करके भारत की इकॉनमी पांच ट्रिलियन डॉलर करने की बात कह रहे हैं। लेकिन पूर्व आरबीआई गवर्नर, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार के बाद भारत की दिग्गज कंपनी बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज ने भी मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया है।

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जब देश की ‘जीडीपी’ में बड़ा योगदान देने वाले लोग ही सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं तो फिर पीएम मोदी की बात कहां तक सच साबित होगी! ये बड़ा सवाल है।

राहुल बजाज ने ऑटो इंडस्ट्री के बिगड़ते हालात पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि, “ऑटो सेक्टर बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कार, कमर्शियल व्हीकल्स और टूव्हीलर्स सेग्मेंट की हालत ठीक नहीं है। कोई मांग नहीं है और कोई निजी निवेश भी नहीं है, तो ऐसे में विकास कहां से आएगा? क्या विकास स्वर्ग से गिरेगा?” साथ ही इस दिग्गज उद्योगपति ने इशारों-इशारों में केंद्र सरकार पर गुमराह करने का आरोप भी लगाया है।

वहीं कैफे कॉफी डे (CCD) के मलिक वी जी सिद्धार्थ को केंद्रीय एजेंसी आयकर विभाग ने इतना परेशान (उत्पीड़न) किया कि उन्होंने खुदकुशी कर ली। आयकर विभाग द्वारा परेशान करने की बात सिद्धार्थ ने खुदकुशी करने से पहले लिखे पत्र में भी कही हैं।

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बता दें कि मोदी सरकार में 45 सालों बेरोजगारी सबसे ज्यादा बढ़ी है। जीडीपी पिछले वित्तीय वर्ष अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक आर्थिक वृद्धि दर 6.8% रही। वहीं जनवरी से मार्च तक की तिमाही में ये दर 5.8% तक ही रही। ये दर पिछले दो साल में पहली बार चीन की वृद्धि की दर से भी पीछे रह गई है।

फिर ऐसे में मोदी सरकार और बीजेपी की झोली में मानो, राज्यों में तोड़-मरोड़ कर चाहे जैसे हो सत्ता हथियाना भर रह गया है। आर्थिक हालत ठीक है तो फिर परेशान करने वाले आकड़ें क्यों सामने आ रहे हैं?

मगर मीडिया क्या दिखा रहा है इसपर नज़र डाल लेना ज़रूरी है। वो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा टीवी पर उठा रही है। सत्तापक्ष की ख़बरों को दिखाकर और सरकार की पीठ थपथपा कर मीडिया को मानो जो ख़ुशी मिलती है वो जनहित के मुद्दों में नहीं मिलती। हर तरफ धारा 370 और आर्टिकल 35-A, तीन तलाक  का ज़िक्र किया जाने लगा है जैसे रातों रात सब कुछ बदल जाएगा।

  • अभिनव यादव